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Monday, April 15, 2024

पाकिस्तान में (Gandhi ji) को कैसे याद करता है?

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Gandhi ji : दुनिया के महान वैज्ञानिकों ने एक अल्बर्ट आइंस्टीन महात्मा गांधी जी से उम्र में केवल 10 साल के छोटे थे. उन्होंने 2 अक्टूबर, 1944 को महात्मा गांधी के ७५ और जन्मदिन पर एक पत्र भी लिखा,

Gandhi ji : अपने लोगों का एक नेता, जिसकी सफलता तकनीकी उपकरणों और कलाबाजी पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसके व्यक्तित्व की विश्वसनीय क्षमता पर निर्भर है. एक विजयी योद्धा भी ताकत इस्तेमालकरने से नफरत करती है. एक बुद्धिमान और विनम्र इंसान, जो बार-बार सुलझे मस्तिष्क के साथ काम भी करता है, जिसने अपनी सारी ऊर्जा भी समर्पित कर दिया होता है, एक इंसान जो यूरोप की और निर्दयिता का साधारण मानव में रहकर डटकर सम्मान किया है… भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि हाड़-मांस से बना होता है

और गांधीजी को ये पहली चिट्ठी भी नहीं थी. दोनों महान शख्सियतों की आपस में पत्रों के जरिए बात होती रहती थी. आइंस्टीन पर महात्मा गांधी गहरा प्रभाव था.और इनमें एक महान आबादी अल्बर्ट की और दूसरी महात्मा गांधी से होती है .

Gandhi ji : यहां आइंस्टीन का जिक्र इसलिए किया कि उस समय राजनीति और आंदोलनों से दूर रहने वाला एक चर्चित व्यक्ति भी महात्मा गांधी से किस तरह प्रभावित होता है . उस समय गांधी जी इतना बड़ा प्रतीक बनाते है कि जो उनकी राह पर चलता है उसे भी ‘गांधी’ जी ने कहते है। जैसे मार्टिन लूथर किंग को अमेरिकी गांधी जी होते है और नेल्सन मंडेला को अफ्रीकी गांधी जी भी लगे थे . इसी तरह पाकिस्तान में अब्दुल गफ्फार खान को फ्रंटियर यानी सीमांत गांधी भी कहा जाता था.

लेकिन, ये सभी बातें काफी पुरानी हैं. पांच दशक से भी ज्यादा पुरानी. ऐसे में आज 30 जनवरी को महात्मा गांधी अब अमेरिका, यूरोप और पाकिस्तान में शांति से याद भी किया जाता है?

गांधी जी कभी अमेरिका नहीं गए.और भारत के बाद उनको सबसे ज्यादा मुरीद यहीं पर होते हैं. इतिहासकार रामचंद्र गुहा के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा क्रेडिट अमेरिकी प्रेस को जाना भी चाहिए. जब भारत में महात्मा गांधी आजादी की लड़ाई लड़ भी रहे थे. तब अमेरिकी क्योंकि तब ब्रिटेन और अमेरिका की इतनी गहरी नजदीकियां नहीं थी कि अमेरिकी प्रेस को दबाया जा सकता. अमेरिकी प्रेस गांधी को इसलिए कवर भी करती थी क्योंकि गांधी के विचार अमेरिकियों विशेष तौर पर अश्वेतों को पसंद होते है .और गांधी जी की तस्वीर जिस दिन छपती थी, अखबार की कॉपियां भी कम पड़ जाती थीं.

Gandhi ji : 1930 में जब गांधी जी ने दांडी मार्च भी निकाला, तो ब्रिटिश सरकार ने उन्हें कई महीने के लिए जेल भी भेज दिया. तो उनके पास भारत में बाद अमेरिका से ही सबसे ज्यादा पत्र आए थे. इनमें एक पत्र उस समय तक खूब चर्चाभी होता है . इसे शिकागो के रहने वाले आर्थर सेवेल नाम भी एक व्यक्ति ने लिखा था. इसमें लिखा था,

Gandhi ji : ‘अफ्रीकी-अमेरिकियों को भारत और भारतीयों के साथ सहानुभूति है. बल्कि हमें बगैर किसी जुर्म के जेलों में जेलों में ठूंस दिया जाता है. हम लोगों को इकट्ठा कर पीटा जाता है, लिंच तक किया जाता है. भगवान आपको आशीर्वाद दें कि आप अहिंसा के जरिए जो महान लड़ाई लड़ रहे हैं, उसे तब तक जारी रख सकें जब तक जीत हासिल नहीं हो जाती है

दो बार पर्सन ऑफ द ईयर

Gandhi ji : अमेरिका के श्वेत नागरिकों के बीच भी चर्चित होते थे. वो इसलिए क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर साफ़ कर दिया जाता था उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अंग्रेजों या क्रिस्चयनों से नफरत ही नहीं है. बल्कि वे ब्रिटिश सरकार की नीतियों और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ होते हैं. उन्होंने कई साक्षात्कारों में ये भी बताया था उनके सबसे करीबी दोस्त एक ब्रिटिश पादरी सीएफ एंड्रयूज होते हैं. जिन्होंने अमेरिकी लोगों के लिए उन पर कई किताबें और कई लेख लिखे हैं.

Gandhi ji : अमेरिका के शिकागो स्थित पत्रिका क्रिश्चियन सेंचुरी ने तो कई बार गांधी के नाम को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया, हालांकि, ये सम्मान महात्मा गांधी को नहीं मिल सका. आजादी की लड़ाई के समय टाइम मैगजीन ने महात्मा गांधी का फोटो अपने कवर पेज पर दो बार छापा था. उसने गांधी जी को पहली बार जनवरी 1931 में और फिर जून 1947 में ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना था.

Gandhi ji : अमेरिकियों के दिलों में गांधी जी के लिए जो जगह तब बनी थी, वही आज भी नजर आती है. 9 सितंबर, 2009 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा वर्जीनिया के एक स्कूल में जाते है . यहां लिली नाम की एक छात्रा ने उनसे पूछ दिया कि यदि आपको मौका मिले तो आप किस जीवित या मृत व्यक्ति के साथ डिनर करना चाहेंगे?

ओबामा ने फट से जवाब दिया-

“मुझे लगता है कि मैं महात्मा गांधी के साथ डिनर करना चाहूंगा. वो मेरे सच्चे हीरो होते हैं. लेकिन शायद ये डिनर बहुत छोटा भी होगा, क्योंकि गांधी जी ज्यादा खाते भी नहीं थे”.

Gandhi ji : अमेरिकी संसद में दिसंबर 2020 में एक बिल भी पारित भी हुआ. जिसका मकसद शिक्षण संस्थाओं में गांधी के विचारों को ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाता था. अब लगभग हर अमेरिकी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के सिलेबस में गांधी के विचार मौजूद होता हैं. यहां होने वाली पर्यावरण और मानवा अधिकारों की डिबेट में गांधी जीवंत भी होते हैं. अमेरिका के शहरों में भारत के बाद गांधी जी की सबसे ज्यादा मूर्तियां होती हैं. एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में जाइए, यहां सड़क पर ट्रैफिक कम करने के लिए भी गांधी के विचारों का सहारा लिया जाता है.और ‘गांधी जी भी पैदल चलते थे’.

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Gandhi ji : जी को यूरोप कैसे याद करता है
मार्टिन कम्पनी , जर्मनी के मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक होते हैं.

उन्होंने लिखा भी है,

Gandhi ji : और कुछ साल पहले ही गांधी की तरह यहां लेच वालेसा नाम का एक शख्स दृढ़ निश्चय करके शांतिपूर्ण विरोध भी करने लगा था . उसने पूरे देश को हिला भी दिया, क्योंकि लोगों को उसमें एक गांधी जी ने दिखा और वे उसके पीछे बड़ी संख्या में एकजुट हो गए.और साल 2020 में बेलारूस में भी तानाशाही के खिलाफ बड़ा आंदोलन शांतिपूर्ण भी चला.’

मार्टिन कम्पनी का मानना होता है कि २० वीं शताब्दी में यूरोप के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर महात्मा गांधी ने अकेले और सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा होता है. कोई अन्य भारतीय विचारक, भारतीय संत या स्वतंत्रता यहां गांधी के बराबर प्रभावशाली भी नहीं रहा है.

Gandhi ji : जर्मनी की स्कूली किताबों में महात्मा गांधी पर बड़ी संख्या में निबंध भी लिखे गए हैं. इनमें गांधी की तुलना ईसा मसीह से की गई होती है. यहां के कई लेखक गांधी को ईसा मसीह जैसी शख्सियत की तरह भी देखते हैं. इनमें से कई का मानना होता है कि गांधी धरती पर ईसा मसीह के एक अवतार के रूप में आए थे. उन्होंने साड़ी जिंदगी ईसा मसीह के मानवता के सिद्धांत पर दिया जाता था.

पाकिस्तान में गांधी को कैसे याद किया जाता है?

Gandhi ji : महात्मा गांधी की यदि 30 जनवरी, 1948 को हत्या भी होती है तो कुछ दिनों बाद वे पाकिस्तान भी जाने वाले थे. वे लाहौर, रावलपिंडी और कराची जाने की ख़्वाहिश भी रखते थे. गांधी जी पाकिस्तान की यात्रा भी इसलिए करना चाहते थे क्योंकि दोनों देशों में बंटवारे के बाद हुई भयंकर हिंसा के बाद सौहार्द का वातावरण भी बने. इरादा भी किया था और पाकिस्तान भी जाएंगे. बिना वीजा और पासपोर्ट के. कहते थे, मेरा ही देश है.अपने देश जाने के लिए पासपोर्ट मई क्यों लूंगा ? और गांधी जी का क्या हश्र हुआ, ये सब इतिहास होता है.

Gandhi ji : पाकिस्तान में अपनी इतिहास की किताबों के लिए जगह भी होती है. हिंदुओं के नेता भी आमतौर पर. हिन्दू में गहरी आस्था रखने वाला. हिंदुओं का समर्थकभी होता है बंटवारे के लिए जिम्मेदारभी होता है .और अल्लाह के कानून की जगह हिंदुओं के कानून वाला देश बनाने का पक्षधर. ऐसा देश होता है जहां मुसलमानों को अछूत समझा भी जाता है जहां अंग्रेजों की गुलामी खत्म होने के बाद मुसलमानों को हिंदुओं का गुलाम बनना पड़ता.है मुसलमानों की सच्ची आजादी का विरोधी. होती है ऐसी आजादी का विरोधी,होती है जहां मुसलमानों पर केवल मुसलमान ही राज करते. है पाकिस्तानी इतिहास में गांधी को ऐसे ही ‘खलनायक’ की जगह भी दी गई है. जिन्होंने इतिहास के नाम पर केवल ऐसी ही कोर्स की किताबें पढ़ी जाती हैं वहां, वो गांधी को ऐसे भी जानते हैं.

Resource : https://bit.ly/3kUnaes

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