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Saturday, February 24, 2024

Kela Ki Kheti : केला की खेती

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Kela Ki Kheti : केला की खेतीfarming in hindi: भारत में केला (Banana) आम के बाद सबसे लोकप्रिय फल होता है। केले की खेती रोज़गार का एक बेहतर विकल्प होती है। किसानों के लिए केला की खेती (kela ki kheti) काफी लाभकारी कृषि व्यवसाय होती है। कम लागत में इससे ज्यादा मुनाफा लिया जाता है।

इन दिनों में इसके उत्पादन की तकनीक में भी काफी बदलाव भी आया है। टिशू कल्चर (tissue culture) तकनीक की मदद से केले का अधिक उत्पादन लिया जाता है। यह काफी स्वादिष्ट भी होता है।

केले की खेती

तो आइए, इस लेख में केले की खेती कैसे करें (kela ki kheti kaise karen) इसका विस्तार से जानें।

सबसे पहले केला की खेती (kela ki kheti) के लिए जलवायु को भी हम जानते हैं।

केला की खेती के लिए जलवायु Kela Ki Kheti

केला (banana) में गर्म जलवायु का पौधा होता है। इसके लिए अधिक पानी की जरूरत होती है। यह उष्णकटिबंधीय फसल भी होती है। इसकी खेती 15 से 30 डिग्री सेल्सियस और 75-85 प्रतिशत आर्द्रता वाले तापमान में पैदावार भी अच्छी होती है। समुद्र तट से 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह फसलभी अच्छी होती है। वहीं 12 डिग्री सेल्सियस से नीचे इस फसल की उपज करें तो ठंड से फसल नुकसान होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। यदि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चले तो भी केले की फसल को नुकसान भी पहुंच सकता है।

केला की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

केले की खेती (kela ki kheti) के लिए बलुई मिट्‌टी ही सबसे बेहतर होती है। वैसे तो केला सबसे खराब से लेकर सबसे अच्छी मिट्टी में इसकी भी पैदावार हो सकती है, लेकिन इसकी खेती शुरू करने के पहले मिट्टी की जांच भी जरूर कराना चाहिए।

Kela Ki Kheti खेत में जल निकासी, पर्याप्त उर्वरता और नमी होना जरूरी होता है। उन्नत किस्म की बलुई मिट्टी जिसका पीएच लेवल 6-5 से 7-5 के बीच हो तो उस स्थिति में केले की उन्नत खेती संभव होती है। खारा और ठोस मिट्टी, चूना युक्त मिट्टी (Calcareous soil) आदि इस फसल के लिए उपयुक्त नहीं होती है। निचले इलाकों की मिट्टी, खराब जल निकासी वाली मिट्टी, ज्यादा रेतीली मिट्टी आदि में इस फसल को उपजाने से बचना भी चाहिए।

जो मिट्टी अम्लीय (acidic) और ज्यादा क्षारीय (alkaline)। मिट्टी में काफी मात्रा में नाइट्रोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में फास्फोरस, पोटैशियम होता है । इस प्रकार की मिट्टी केले की खेती के लिए काफी लाभकारी भी होती है। जलवायु, मिट्टी, तापमान, समय आदि को ध्यान में रखते समय केला की खेती (kela ki kheti) करनी चाहिए।

केले की खेती कैसे करें
फोटो क्रेडिट- गांव कनेक्शन
केला की उन्नत किस्में
यदि आप केले की खेती की शुरुआत भी करना चाहते हैं तो जलवायु, मिट्टी आदि को ध्यान में रखते हुए सबसे जरूरी बात होती है कि केले की उन्नत किस्मों का चयन भी करें।

भारत में 20 से भी ज्यादा केले की किस्में उपलब्ध होती है। ड्वार्फ कैवेंडिश (dwarf cavendish), रोबस्टा (Robusta), मोनथन (Monthan), पूवन (Poovan), नेंद्रन (nendran), रेड बनाना (red banana), न्याली (nyali), सफेद वेलची (safed velchi), बसाराई (basarai), अर्धपुरी (ardhapuri), रसथली (rasthali), कर्पूरवल्ली (karpuravalli), ग्रैंड नैन (grand naine) आदि केले की प्रमुख किस्में होती हैं।

इन दिनों G-9 किस्म पसंदीदा किस्मों में एक होती है। यह देखने में सुंदर और उत्पादन में सबसे अच्छी प्रजाति लगती है। वहीं इसकी फसल अन्य की तुलना में बड़ी भी होती है, केले का कवर भी मोटा होता है, देखने में आकर्षक और ज्यादा दिनों तक टिका रहता है। इसकी पैदावार अधिक ज्यादा होती है।

ऐसे करें केला की खेती के लिए तैयारी
गर्मियों में कोशिश करें कि 3-4 बार खेत की जोताई भी करें।

आखिरी जुताई के समय गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह उसे मिला लें।

खेत की मिट्टी को समतल करने के लिए लेजर लेवलर और ब्लेड हैरो का इस्तेमाल भी करें।

बिजाई के लिए फरवरी के बीच का समय व मार्च का पहला सप्ताह भी सबसे सही होता है।

उत्तर भारत के तटीय क्षेत्रों में जहां तापमान 5-7 डिग्री सेल्सियस से कम हो वहां रोपाई के लिए 1.8 मीटर X 1.8 मीटर से कम भी फासल नहीं होना चाहिए।

बीज की गहराई के लिए केले की जड़ों को 45x45x45 सैंटीमीटर या 60x60x60 सैंटीमीटर के गड्ढों में अधिक डालें।

कोशिश करें कि गड्ढों को खुले धूप में छोड़ें, ऐसा करने से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीट भी मर जाये ।

गड्ढों को 10 किलो रूड़ी की खाद या गला हुआ गोबर, नीम केक 250 ग्राम व कार्बोफ्युरॉन 20 ग्राम में भरें।

गड्ढों के बीच में केले के पौधे को डालें व आसपास मिट्टी डालकर दबाएं, ज्यादा गहरी रोपाईभी करें।

कीट और रोग प्रबंधन

Kela Ki Kheti हर किसान की कोशिश होती है कि वो फसल में लगने वाले कीट की पहचान सके , जैसे फल की भुंडी, राइजोम की भुंडी, केले का चेपा, थ्रिप्स, निमाटोड, सिगाटोका पत्तों पर धब्बा रोग, एंथ्राक्नोस, पमाना बीमारी, फुज़ेरियम सूखा, गुच्छे बनना आदि रोगों की पहचान कर एक्सपर्ट की सलाह अनुसार कीटनाशनक आदि डाल बीमारी से बचाव अपने फसल को बचा सकते हैं।

केले की खेती के लिए आप जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि भी वैज्ञानिकों से ट्रेनिंग और सलाह ले सकते हैं।

केला की खेती में लागत और कमाई

Kela Ki Kheti यदि आपके पास एक एकड़ जमीन है, जिसपर आप केले की खेती (kela ki kheti) करना चाहते हैं। इसपर 1.8 गुणा 1.5 मीटर की दूरी पर पौधा लगाते हैं तो आप कुल 1452 पौधे लगा पाएंगे। ग्रैंड G-9 के एक पौधे की कीमत औसतन 15 रुपए है तो करीब 20328 रुपए में पौधे खरीद पाएंगे, खाद व अन्य चीजों की कीमत करीब 30 हजार मानें तो 50 हजार रुपए में आप खेती कर सकते हैं।

वहीं एक केले के पेड़ से कई फसल भी निकलता है, एक पेड़ से औसतन दो ही घवध निकले व उस समय मंडी के बाजार भाव की कीमत 250 रुपए होती है तो एक सीजन में किसान सात लाख 26 हजार रुपए की आमदनी कर भी सकता है।

Kela Ki Kheti खेती को शुरू करने के पूर्व इसके बारे में पूरी जानकारी व एक्सपर्ट की मदद लेना आवश्यक भी होता है। एक्सपर्ट की मदद लेकर खेती करें तो आप केले की खेती से बेहतर उत्पादन और मुनाफा भी कमा सकते हैं।

केले की खेती (kela ki kheti) की बात होती है । लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स भी मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित भी iकर सकते हैं।

Resource : https://bit.ly/3vtUBGQ

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